युगों पूर्व आश्रमों में पनपी गुरु शिष्य परम्परा ने ज्ञान,
विज्ञानं और आध्यात्म का कभी खत्म न होने वाला खजाना हमारे लिए छोड़ा
है| हमने अपनी लोक, धार्मिक और पौराणिक कथाओ में
गुरुओ के आशीर्वाद के अनगिनत प्रसंग सुने है| सभी में
गुरु को ब्रम्हा, विष्णु, महेश के बराबर स्थान दिया गया है|
शास्त्रों में कहा गया है की मनुष्य के तीन प्रत्यक्ष देव है -माता,
पिता, गुरु| माँ जन्म देती है, जीवन की रचियता है इसीलिए
ब्रम्हा है | पिता जीवन के पालनकरता है इसीलिए विष्णु का रूप
माने जाते है| गुरु व्यक्ति के कुसंस्कारो को समाप्त करते है, इसीलिए वह
महेश है | गुरु वह डोर है, जो आत्मा का परमात्मा से मिलन करने
में पूर्ण सक्षम है| जीवन के हर कार्य को सिखाने वाले मार्गदर्शक
गुरु ही है |
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